दुनिया से नफ़रत
ये दुनिया एक कचरा-पेटी है। आग लगा दो।
"Shit" शब्द शिकायत नहीं — एक पवित्र ritual है। SHIT का behavior pattern drama में लिपटा एक paradox है। मुँह: "ये प्रोजेक्ट एक total shit है।" हाथ: चुपचाप Excel खोल रहे, formula models और Gantt charts बना रहे। मुँह: "ये colleagues सब shit हैं।" हाथ: colleague का mess होने के बाद रात-रात जागकर उसे पूरी तरह साफ़ कर रहे। मुँह: "ये दुनिया shit है, अभी ख़त्म हो जाए।" हाथ: अगले दिन ठीक 7 AM उठकर, shit जैसी मेट्रो में चढ़कर, shit जैसी नौकरी पर जा रहे। डरो मत — यह दुनिया के अंत का alarm नहीं है। यह दुनिया बचाने का charge bugle है।
अपने बारे में मन में एक मोटा हिसाब है, किसी अनजान की बात से बिखरने वाले नहीं।
अपने ग़ुस्से, इच्छाओं और सीमाओं का साफ़ नक़्शा दिमाग़ में रहता है।
सुकून और सुरक्षा ज़्यादा मायने रखते हैं, ज़िंदगी को रोज़ sprint mode में रखने की ज़रूरत नहीं।
रिश्ते पर भरोसा करना पसंद है, हल्की-फुल्की हवा से डर के नहीं बिखरते।
प्यार में संयम ज़्यादा, दरवाज़ा बंद नहीं, पर पास बहुत सख़्त है।
निजी जगह बहुत अहम है, कितना भी प्यार हो, अपना एक कोना अलग रखना ज़रूरी है।
दुनिया पर shield पहनकर नज़र डालते हैं — पहले शक़, फिर नज़दीकी।
मानने का वक़्त हो तो मान लेते हैं, मोड़ने का हो तो ज़िद भी नहीं करते।
कभी लक्ष्य है, कभी सब छोड़कर आराम करने का मन, जीवन-दृष्टि आधी जगी रहती है।
नतीजा, विकास और आगे बढ़ने का एहसास ज़्यादा आसानी से जोश देता है।
झट से फ़ैसला लेते हैं, एक बार तय हो जाए तो पीछे मुड़कर रगड़ना पसंद नहीं।
कर लेते हैं, पर मूड़ और मौक़े पर निर्भर — कभी स्थिर, कभी ढीले।
सोशल होने में धीमी शुरुआत, आगे बढ़कर बात करने के लिए काफ़ी हिम्मत जुटानी पड़ती है।
सीमा का एहसास तेज़ है, कोई बहुत पास आए तो सहज ही आधा क़दम पीछे हट जाते हैं।
हर मौक़े के हिसाब से अपना रूप बदलने में माहिर, सच रिश्ते की क़िस्म देखकर हिस्सों में बाहर आता है।