बेलगाम
क्या?! ये कैसी पर्सनैलिटी है?
मानव सभ्यता के concrete jungle में एक ऐसी घास उग आई है जिसे कोई herbicide मार नहीं सकता — एक मानव-आकार का जीव जिसमें अलौकिक vitality है। इसका scientific name: FUCK। FUCK के worldview में social rules का absolutely कोई मतलब नहीं। FUCK का emotional switch एक physical switch है जिसकी सिर्फ़ दो positions हैं: FUCK YEAH और FUCK OFF। FUCK instant gratification से आगे की चीज़ ढूँढता है — वो raw life-force ढूँढता है जो नसों में बेक़ाबू साँड की तरह दौड़े। जब बाक़ी सब domesticated poultry बन चुके हैं, FUCK बियाबान पर गूँजता आख़िरी भेड़िए का howl है।
आत्मविश्वास मौसम के साथ ऊपर-नीचे होता है, हवा का रुख़ सही हो तो उड़ान, ग़लत हो तो सिकुड़न।
मन का चैनल धुंधला रहता है, "मैं कौन हूँ" वाले loop पर अटकना आदत है।
सुकून और सुरक्षा ज़्यादा मायने रखते हैं, ज़िंदगी को रोज़ sprint mode में रखने की ज़रूरत नहीं।
रिश्ते में अलार्म बहुत तेज़ है, "read कर दिया पर जवाब नहीं" से पूरी कहानी बन जाती है।
एक बार मान लिया तो पूरी तरह डूबते हैं, भावना और एनर्जी दोनों खुलकर देते हैं।
चिपकना भी आता है, चिपकवाना भी — रिश्ते में गर्माहट का एहसास बहुत मायने रखता है।
दुनिया पर shield पहनकर नज़र डालते हैं — पहले शक़, फिर नज़दीकी।
नियमों से बच सकें तो बचते हैं, सुकून और आज़ादी हमेशा आगे।
कभी लक्ष्य है, कभी सब छोड़कर आराम करने का मन, जीवन-दृष्टि आधी जगी रहती है।
कभी जीतने का मन, कभी सिर्फ़ झंझट से बचने का — प्रेरणा मिली-जुली रहती है।
कोई फ़ैसला लेने से पहले कई चक्कर लगते हैं, मन के अंदर की मीटिंग हमेशा overtime चलती है।
अमल और deadline का गहरा याराना है, जितना लेट हो उतना जागरण का एहसास।
महफ़िल ख़ुद खोलना पसंद है, भीड़ में सामने आने से डर नहीं लगता।
रिश्तों में नज़दीकी और घुल-मिल जाना भाता है, जान-पहचान होते ही अंदरूनी दायरे में ले आते हैं।
हर मौक़े के हिसाब से अपना रूप बदलने में माहिर, सच रिश्ते की क़िस्म देखकर हिस्सों में बाहर आता है।